वक़्त से शिकवा नहीं कुछ,
न किस्मत से ही कुछ शिकायत है,
जो मिला तकदीर अपनी,
उस रब की सब इनायत है...
और हमने सुना थे ये कभी कि,
वक़्त ये रुकता नहीं,
गर ख़ुशी न आज है तो,
गम भी ये टिकता नहीं...
पर सुनने मे ही अच्छी लगे बस,
ये बात किताबो मे लिखी,
भाती नहीं है ये वक़्त-ए-फितरत,
जब पास न होती ख़ुशी.....
©सचिन
So true.. :)
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