कितनी मुश्किल किसी से ये पहचान भी,
कि मिलके भी उनसे हम अनजान ही,
उनकी नजरो मै खुद की जगह न पता,
चाहे मिलते वो मुझसे मुस्कुरा के सदा...
उनसे बाते करू तो पता ही नहीं,
कि मेरी बातो की कोई कदर भी कही,
उनके दिल मै छुपा क्या है मेरे लिए,
कुछ सवाल जो आजकल मुझको घेरे हुए...
क्या मै इस बात के आज काबिल भी हु?
कि उनके दोस्तों की कड़ी मै जो मै शामिल भी हु?
फिर लगे ये तो उसकी अदा है कोई,
वो तो मिलती सदा सबसे मुस्कुरा करके ही...
फिर भी भाती क्यू दिल को उसकी अदा ये बड़ी,
और क्यू लगती जुडी उनसे जिंदगी की ये कड़ी,
आज दिल के इन सवालो से भी लगता कोई इत्तेफाख नहीं,
क्यू की उनकी आँखों मै देखा कभी कोई फरेब ही नहीं...
और तमन्ना ये नहीं की उनकी नजरो मै हम कुछ खास हो,
या उम्र भर वो मेरे कही आस पास हो,
और पता ये भी नहीं कितना वक़्त लगेगा इस गुजारिश के पुरे होने मै,
कि एक जगह मेरी भी हो उम्र भर उनके दिल के किसी कोने मै...