देखते थे जिनमे खुद को,
वो आइने बदल गए,
जब से मिले हो तुम,
जिंदगी के मायने बदल गए...
पीकर नजर के जाम तेरे,
नशे के पैमाने बदल गए,
और पाकर के तेरा साथ,
शाम के वो मयखाने बदल गए...
महफ़िल मे दोस्तों की अब रोनक ही न लगे,
होते न तुम जहा सभी वो ठिकाने बदल गए,
बाते भी इस जहाँ की अच्छी न अब लगे,
दिल को दे जो सुकून सभी वो अफसाने बदल गए..
बदला नहीं है कुछ भी और सब कुछ बदल गया है,
चीजो को देखने का नजरिया बदल गया है,
तन्हाई मे भी मेरी कोई आकर के बस गया है,
और मेरी खामोशियो की कोई बोली बदल गया है..
©सचिन
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