Thursday, April 28, 2011

बड़ी महंगी हुई शराब....

वो बेवफा नहीं थे हालात ने बना डाला है,
पर उनकी इस हरकत ने उसको तो रुला डाला है,
इंतज़ार करती आँखों को आज भी दीदार नहीं,
दूर तक फैले सन्नाटे पे होता उसको भी ऐतबार नहीं...
खाली पड़े जाम आज करते है कोई शोर नहीं,
और प्यार से देखता आज कोई उसकी ओर नहीं,
जाम से जाम भी अब कंहा टकराते है,
दौर ऐसा की लोग मयकशी की लिए कंहा जाते है...
खाली पड़े मयखाने मै होती अब महफिले कम है,
ओर देख कर इसको ही शाकी की आँखे नाम है...
पर हालात से रूबरू शाकी को कराये कैसे,
बड़ी महंगी हुए शराब ये उसे बताये कैसे..
दिल को तो उसके गम से पूरा इतेफाक है,
पर महंगाई के इस दौर मै रखना जेब का भी थोडा हिसाब है...
और तमन्ना आज भी जाम से जाम टकराने की है,
पीकर के हाथो से शाकी के खुद को ही भूल जाने की है,

मगर जबसे 65 वाली 95 मै आने है लगी,
उनके दिल मै भी ये बेवफाई की आदत समाने है लगी....
©सचिन

हाँ , एक ख्वाब ही तो है...

हाँ,,, एक ख्वाब ही तो है,
हाँ,,, पर आज भी तो है,
एक पल मै उम्र जी लेने का,
दरिया से पानी पी लेने का,
साहिल पे बैठ कर के कही,
लहरों से भीग लेने का,
पेड़ो की टहनियों के तले,
सूरज की ये तपिस न रहे,
आँखों को बंद करलू जो जरा,
तो दिल का न कोई मंजर ये कहे,
है नहीं वक़्त अभी,
अभी तू आराम न कर..
बारिस मै भीग कर के यहाँ,
वक़्त ये बर्बाद न कर,
जो करे दिल ये मेरा,
वो सभी आज करू,
अपनी ख्वाहिसों के खिलने के लिए,
मौसम का न इंतज़ार करू...
दिल की इक ख्वाहिश का इजहार ही तो है,
हाँ,,, एक ख्वाब ही तो है,
हाँ,,, पर आज भी तो है....
©सचिन

आज रह जाने दे...

आज रह जाने दे इन रेशमी जुल्फों को,
मेरे चहरे पे गिरा इनकी इस खुशबू को,
आज डूब जाने दे अपनी इन निगाहों मै,
बैठा रहने दे मुझे अपनी इन पनाहों मै...
भर के बाहों मै मुझे पास हो जाने दे,
अपने होठो मै मुझे आज खो जाने दे,
आज रह जाने दे आँख मै सिलवट को,
वक़्त दे दे तू जरा अपनी इस करवट को...
आज बाहों की पकड़ थोडा कस जाने दे,
तेरी साँसों मै कही मुझे बस जाने दे,
आज पर्दा न कोई मुझसे तुम यार करो,
भूल दुनिया ये डर ऐसा कुछ आज करो...
आज बह जाने दे वक़्त के साथ मुझे,
दिल मै रख लेने दे अपना अहसास मुझे,
दिल के सैलावो मै आज डूब जाने दे,
कुछ मिलो इस तरह सब कुछ भूल जाने दे....
©सचिन