Wednesday, September 14, 2011

साथ...

हुडदंग सा होता रहे तन्हाई मे,
गहराई मे दिल के कही,
लगता है बस हर पल यहाँ,
बैठे हो तुम पहलू मे ही...
कभी हस देते हो यू ही,
अजब चहरे बनाकर के,
कभी छेड़ो मुझे यू ही,
नक़ल मेरी बनाकर के...
करो जब भी जो तुम ऐसा,
अजब सा चैन है दिल को,
कोई तो पुण्य ही मेरा,
मिले हो आप जो मुझको...
कभी इतरा के किस्मत पे,
खुदही पे गर्व सा होता,
बड़ी दौलत सी पा बैठा,
मिला जो साथ है तुमसा...
©सचिन

Wednesday, September 7, 2011

वो गलिया...

मशगूल हो गए है आज कुछ ऐसा इन मशगूलियो मे,
कि वक़्त मिलता ही नहीं अब घूमने का उन गलियों मे,
जिनके दामन मे वो बेफिक्र हुडदंग हुआ करता था,
वो कोने का खाली घर जिसमे लुका छुपी का खेल हुआ करता था...
तू चोर मे सिपाही वो शाम तले खेलना आइस पाइस,
लकड़ी के धनुष वाण से महाभारत का वो जो युद्ध हुआ करता था,
वो जमघट वो बकबक वो आपस कि झकजक ,
वो छोटी छोटी बाते जिनका न कोई सिर पैर हुआ करता था..
और जब सिमट जाता था उजाला रात की अँधेरी चादर मे,
तो सोते वक़्त सुबह का कितना इंतज़ार हुआ करता था,
कितनी उलझन थी उन बंद कमरों और दीवारों से,
खुली हवा के लिए दिल कितना बेक़रार हुआ करता था...
आज वो गलिया तो है पर वो खाली घर तो नहीं,
वो शाम तले दोस्तों के बकबक भरे जमघट भी नहीं,
उन छोटे छोटो बच्चो के तमाशो को कोई शोर भी नहीं,
ऐसा लगता है अब इन मशगूलियो का कोई छोर ही नहीं....

©सचिन

Monday, September 5, 2011

किसने बनाया Monday

कटता नहीं ये दिन अब,
करलू मे क्या भला?
फुर्सत का ये जो लम्हा,
वो डसता है बेवजह...
बिताकर हसीन छुट्टी,
ऑफिस के नाम पे,
लेकर के झोला पानी,
आया था काम पे...
पर होता नहीं है कुछ भी,
धुंधला सा सब दिखे,
कुर्सी पे बैठने को,
दिल भी न ये करे...
कुछ काम तो है करना,
पर आलस मे हम अड़े है,
टेबल पे सर को रख के,
बस काहिल से ही पड़े है...
किसने बनाया Monday ,
जीना हराम करके,
Sunday तबाह करता,
Friday तक काम करके...
©सचिन

नहीं कोई दूसरा आपसा...

घूम कर आया जहाँ चाँद के भी पार का,
पर था नहीं कोई वंहा भी आपसा,
बिन कहे जाये समझ हर हाल जो,
है पास जो दिल के अजब अहसास सा...
एक शर्त जो रखता हमेशा सामने,
इस साथ की होगी कोई भी शर्त न,
थामे हुए हाथो को चल हर राह पर,
रिश्ते पे हो अपने कभी कोई कर्ज न...
अपना है वो देदे जो ये विश्वास सा,
हो असलियत मेरी नहीं कोई ख्वाब सा,
हर हाल मे हम हाल जो मेरे रहे,
मिलता नहीं कोई दूसरा वो आपसा..
©सचिन