Thursday, July 7, 2011

बिन तेरे...

खुद अपने ख्यालो से क्युं डरने लगे है,
हुआ क्या है, जो रातो को जगने लगे है,
क्युं उजाले हमे रास आते नही ये,
क्युं अंधेरो मै अब हम यु छुपने लगे है,
जो बिताया यहा तुम्हारे बिना,
वो दिन भी कोई दिन है मेरा,
वो उजाले जिनमे तेरा चहरा नही,
उन उजालो से न कोई रिस्ता मेरा,
वो राते जिनमे तेरे सपने नही,
वो ख्याल कभी मेरे अपने नही,
उन रातो की नींदो से अन्धेरे भले,
जिनमे तुम हो नही तो और कुछ भी नही....
©सचिन

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