मुझे बातो की परवाह नहीं,
मुझे तो बस ख़ामोशी से डर है,
इन बंद होटों के पीछे,
लगता किसी तूफ़ान का घर है...
जब दूरिया भी न हो दरमियाँ,
मगर पास एक ख़ामोशी हो,
और आपस की इस आँख मिचोली मै,
इन आँखों मै एक उदासी हो..
मुझे अंधेरो की परवाह नहीं,
बस उन उजालो से डर है,
जिनकी चकाचोंधो के पीछे,
दिल मै तन्हाइयो का घर है...
©सचिन
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