Monday, July 18, 2011

बातो की अभिव्यक्ती...

अभिवादन अभिव्यक्ती है,
आन्दोलन अतिश्योक्ति है,
गिरकर के उठ पाना,
तेरे मन की ही शक्ति है..
मन के तू कपटो को,
कपटो से मत ढकना,
गर मुश्किल मे हो तुम तो,
खंजर संग मत रखना...
देखो जो ढंग से तुम,
तो सच दिखता है सबका,
ख्वाबो के शीशो मे,
सच बिकता सपनो का...
पत्थर जो मरोगे,
तो चटकेगा रंग इसका,
खुदको जो झकझोरो तो,
गिर पड़ता है हर टुकड़ा...
दिल मे गर गम हो तो,
रो लेना जी भर के,
आंशू जो बह जाते,
तो गम हलके हो दिल के...
दिल की सुन लेना,
अभिवादन सपनो का,
चाहो पाना सब,
आन्दोलन बे मतलब का...
गिर कर के उठ पाया,
मेरे मन की शक्ति थी,
कुछ बाते बेमतलब है,
बस बातो की अभिव्यक्ती थी....
©सचिन

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