आईना भी आज् टूट के कह गया,
देखने बाला उन्हे बस देखता रह गया,
वो चहरा किसी हूर सा जो हसीन,
जिसको देखा तो उसका ही मै हो गया..
वो नजर जिसकी गहराई की नाप न,
वो लव जिनका कोई भी सानी नही,
वो अदाये जिन्हे देख कर खो गये,
वो हकीकत है मेरी कोई कहानी नही..
जिसकी चाहत मै देखो नशा ही नशा,
जिसको पाना है पाना कोइ नूर है,
वो अहसास् जो दे गया बेखुदी,
वो कोई और न मेरा महबूब है.....
©सचिन
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