Friday, July 8, 2011

ये लम्हा...

एक नया दौर जिंदगी का,
आज फिर मेरे दरवाजे पे,
एक नया लम्हा अहसासों का,
आज फिर पास मेरे दिल के..
एक नयी मंजिल छू लेने को,
आज तो तन्हा भी नहीं है ये साथ,
एक सुगबुगाहट इन हवाओ मे,
थम ही जाये ये लम्हा काश...
©सचिन

No comments:

Post a Comment