चलो आज कुछ यू कर पाऊ,
तेरे लिये कोई गजल कर पाऊ,
दरिया, नदिया, सागर, मोती,
शब्दों की एक माला पिर जाये...
कंकर, पत्थर जोड़ जोड़ के,
सपनो का एक महल बनाऊ,
अरमानो के झरने मे बस,
चाहत के ही फूल खिलाऊ...
बागो के फूलो की खुसबू ,
दामन मे तेरे भर पाऊ,
हल्दी चन्दन उबटन मलके,
कुछ तुमसा ही मे हो पाऊ..
चाँद चांदनी रात सुनहरी,
दिल को तेरे लुभा जो पाऊ,
कोई ऐसी गजल सुनाऊ,
चलो आज कुछ यू कर पाऊ...
©सचिन
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