Wednesday, June 15, 2011

फिर वही कहानी..

हाँ, दर्द अभी ज्यादा है,
क्यू की घाव भी तो अभी ताज़ा है ,
पर ईमान बेच सो रहे लोगो को,
कहा इस बात का अंदाजा है...
चोर नहीं है वो,
दिन रात मेहनत करने वाले है,
रातो की नींदे हराम करके,
अपनी रोजी रोटी कमाने वाले है...
भोक के चाकू तो कभी बन्दूक के जोर पे,
कितनी आसानी से लूट लिए जाते है,
जरा सा प्रतिरोध करने पे,
कितनी बेदर्दी से कूट दिए जाते है..
हमदर्दी तो छोड़ो इन्हें,
उनके आंसू भी न दिखते है,
शायद मल की मिटटी से बने है,
इसलिए इतनी आसानी से इनके ईमान बिकते है..
बनके प्रसाशन इन्हें शासन मे तो रहना है,
पर रोज होते इन जुल्मो के लिए इन्हें कुछ नहीं कहना है,
इनके तो घरो और गाडियों की अलग पहचान होती है,
और लूट की हिस्सेदारी भी तो इनके नाम होती है...
इन्हें तो उस डर का अंदाजा भी नहीं,
दिलो मे बसा रहता है जो हमारे कही,
कल को कुछ हो गया तो,
कौन हमारे अपनों को सम्हाले का यही..
कोई नहीं, आम इंसान हु ,
जल्द ही इस हादसे को भी भूल जाने का वादा है,
हाँ, दर्द अभी कुछ ज्यादा है,
पर घाव भी तो अभी ताज़ा ताज़ा है....
©सचिन

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