आज मयखाने मे बैठा रहने दो मुझे,
आज पी लेने दो जाम साकी से कुछ,
आज रह जाने दो जाम इन हाथो मे,
आज जी लेने दो वक़्त ऐसे भी कुछ...
आज लड़खड़ाने दो मेरे कदमो को जरा,
थक गया हू मै यहाँ सीधी चालो से बहुत,
आज गिर जाने दो खाके ठोकर तुम मुझे,
हो गया कंधो पे बेवजह बोझ बहुत...
आज जी लेने दो खोके सब होश मुझे,
आज लगती है मुझे आँख बोझल ये कुछ,
आज भूल जाने दो नाम मेरा ही मुझे,
बिना उम्मीदों के कट सके वक़्त ये कुछ....
©सचिन
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