हुडदंग सा होता रहे तन्हाई मे,
गहराई मे दिल के कही,
लगता है बस हर पल यहाँ,
बैठे हो तुम पहलू मे ही...
कभी हस देते हो यू ही,
अजब चहरे बनाकर के,
कभी छेड़ो मुझे यू ही,
नक़ल मेरी बनाकर के...
करो जब भी जो तुम ऐसा,
अजब सा चैन है दिल को,
कोई तो पुण्य ही मेरा,
मिले हो आप जो मुझको...
कभी इतरा के किस्मत पे,
खुदही पे गर्व सा होता,
बड़ी दौलत सी पा बैठा,
मिला जो साथ है तुमसा...
©सचिन
गहराई मे दिल के कही,
लगता है बस हर पल यहाँ,
बैठे हो तुम पहलू मे ही...
कभी हस देते हो यू ही,
अजब चहरे बनाकर के,
कभी छेड़ो मुझे यू ही,
नक़ल मेरी बनाकर के...
करो जब भी जो तुम ऐसा,
अजब सा चैन है दिल को,
कोई तो पुण्य ही मेरा,
मिले हो आप जो मुझको...
कभी इतरा के किस्मत पे,
खुदही पे गर्व सा होता,
बड़ी दौलत सी पा बैठा,
मिला जो साथ है तुमसा...
©सचिन
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