वो बेवफा नहीं थे हालात ने बना डाला है,
पर उनकी इस हरकत ने उसको तो रुला डाला है,
इंतज़ार करती आँखों को आज भी दीदार नहीं,
दूर तक फैले सन्नाटे पे होता उसको भी ऐतबार नहीं...
खाली पड़े जाम आज करते है कोई शोर नहीं,
और प्यार से देखता आज कोई उसकी ओर नहीं,
जाम से जाम भी अब कंहा टकराते है,
दौर ऐसा की लोग मयकशी की लिए कंहा जाते है...
खाली पड़े मयखाने मै होती अब महफिले कम है,
ओर देख कर इसको ही शाकी की आँखे नाम है...
पर हालात से रूबरू शाकी को कराये कैसे,
बड़ी महंगी हुए शराब ये उसे बताये कैसे..
दिल को तो उसके गम से पूरा इतेफाक है,
पर महंगाई के इस दौर मै रखना जेब का भी थोडा हिसाब है...
और तमन्ना आज भी जाम से जाम टकराने की है,
पीकर के हाथो से शाकी के खुद को ही भूल जाने की है,
मगर जबसे 65 वाली 95 मै आने है लगी,
उनके दिल मै भी ये बेवफाई की आदत समाने है लगी....
©सचिन
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