Thursday, April 28, 2011

हाँ , एक ख्वाब ही तो है...

हाँ,,, एक ख्वाब ही तो है,
हाँ,,, पर आज भी तो है,
एक पल मै उम्र जी लेने का,
दरिया से पानी पी लेने का,
साहिल पे बैठ कर के कही,
लहरों से भीग लेने का,
पेड़ो की टहनियों के तले,
सूरज की ये तपिस न रहे,
आँखों को बंद करलू जो जरा,
तो दिल का न कोई मंजर ये कहे,
है नहीं वक़्त अभी,
अभी तू आराम न कर..
बारिस मै भीग कर के यहाँ,
वक़्त ये बर्बाद न कर,
जो करे दिल ये मेरा,
वो सभी आज करू,
अपनी ख्वाहिसों के खिलने के लिए,
मौसम का न इंतज़ार करू...
दिल की इक ख्वाहिश का इजहार ही तो है,
हाँ,,, एक ख्वाब ही तो है,
हाँ,,, पर आज भी तो है....
©सचिन

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