खूब लगा लो रगढ़म पट्टी,
पर काम को लेके वही कबड्डी,
चले वही बस राग पुरानी,
रिमझिम बारिश टिमटिम पानी..
मेनेजर हो खून का प्यासा,
issue आते ही करे तमाशा,
emails की चैन चलाके,
meetings मे बाते सुनाके...
KRA की याद दिलाता,
न जाने क्या क्या बक जाता,
गायब करके सट्टी पट्टी,
तुड़वाता फिर कमर की हड्डी..
हमको कर साबित नालायक,
खुद तो हो जाता वो गायब,
औरो के कर्मो को लेके,
तन्हाई मे फिर हम रोते..
फिर से कोई patch लगाके,
ऐसे वैसे कोड चलाके,
कर पाते सीधी ये हड्डी,
कि शुरू हो जाती नयी कबड्डी..
©सचिन
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