Thursday, February 24, 2011

चाहत..

बड़ी मुश्किल मै फस बैठे ये चाहत आप से करके,
लुटा बैठे है सब मेरा नजर की चाल मै फस के,
नहीं भाती कोई महफ़िल नहीं भाता कोई मंजर,
तन्हाई काटती रहती लगा सीने मै एक खंजर...
कभी गुमसुम से रहते है कभी लगते खुदी हसने,
खुली आँखों मै चलते है तेरे संग प्यार के सपने,
कभी तुम पास हो लगते यही पहलू मै हो जैसे,
भुला देते जहाँ मुझको लगा सीने मुझे ऐसे...
कि रहता होश मै तो हू मगर न होश कुछ मुझको,
गवा बैठे है सब अपना कि पाने के लिए तुझको,
हुए बदनाम यारो मै कि "आशिक" नाम अब मेरा,
तेरी चाहत का जादू है कि हुआ है हस्र ये मेरा..
चलो कोई नहीं परवाह कि संग अब साथ है तेरा,
जो पाया है सभी खोकर नहीं कुछ मोल है उसका,
बड़ी दौलत है पा बैठे कि तुमसे आशिकी करके,
कि पा बैठे कई जीवन तेरी चाहत मै हम मरके...
©सचिन

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