Friday, February 25, 2011

वो दौर-ए-जिंदगी

वो रस्ते की नहरिया या नहरिया का रस्ता,
वो लकड़ी  की पुलिया जिसकी हालत थी खस्ता,
की किस्से कई है सुनाने को उसके,
की निकलना था होता कभी रोज जिसपे,
वो ठहाके, वो मस्ती, वो यारो की यारी,
जब कदमो मै लगती थी ये दुनिया ही सारी,
जब सपने बनाते थे तो डरते नहीं थे,
जब होगा क्या आगे इसकी परवाह करते नहीं थे,
वो यारो की टोली वो किस्से कहानी,
वो कच्ची सड़क पे वो अपनी साइकिल पुरानी,
वो हुडदंग सारे वो परवाह किसी की,
बड़ी खुबसूरत थी वो दौर जिंदगी की.....
©सचिन

2 comments:

  1. haha....purani yaden bahut khub....

    ReplyDelete
  2. haan bhai ...kuch likhna hai un dino ke liye,..kabhi time mila 2 kitav likhi jayegi uspe...

    ReplyDelete